न्याय करने वाले ही अन्याय की राह पकड़ ले तो गरीब आदिवासी महिला न्याय के लिए कहा जाए ।

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दिलीपसिंह भूरिया

@ आजाद नगर भाभरा

आजाद नगर भाभरा तहसीलदार जितेंद्र तोमर के खिलाफ जनसुनवाई में आवेदन देने पहुंची जिसमे तहसीदसर के खिलाफ मारपीट और धक्का देकर तहसील कार्यालय से बाहर निकालने और उसकी जमीन दूसरे लोगो के नाम नामांतरण करने का आरोप लगाते हुवे जिला कलेक्टर को जनसुनवाई में एक आवेदन दिया जिसमे आजाद नगर तहसीदार जितेंद्रसिंह तोमर पर जिला कलेक्टर को दिनांक 30.11.2021को जनसुनवाई में एक आवेदन किया था जिसमे श्रीमती जवरी पति नानसिंग भील निवासी ग्राम संदा निवासी ने ग्राम के ही बहादुर पिता भुरका और खेलजी पिता लालू ने उसकी जमीन जबरन और जबजस्ती षड्यंत्र पूर्वक विधि विरुद्ध तरीके से अपना नाम चढ़ा लिया है ।जिसकी शिकायत पूर्ण में दिनांक 03.02.2022 को अनुविभागीय अधिकारी चंद्रशेखर आजाद नगर भाभरा को की थी जिसका पत्र क्रमांक/108/री/2022 को चंद्रशेखर आजाद नगर में दिया था जिसकी सुनवाई हेतु चंद्रशेखर आजाद नगर तहसीलदार जितेंद्रसिंह तोमर के द्वारा तहसील कार्यालय में बुलवाया गया था ।जिसमे उपस्थित हुवी जवरी और उसके पति नानसिंह और उसके पुत्र को तहसील कार्यालय से थप्पड़ और धक्के मारकर तहसीलदार जितेंद्र सिंह तोमर ने निकाल दिया ।जिसके बाद वह महिला जिला कलेक्टर पहुंची और आवेदन किया । जिले में आदिवासियों के नाम पर अपनी नेतागिरी चमकाने वाले संगठन आज कोशो दूर भी दिखाई नही दे रहे है एक आदिवासी महिला और उसके पूरे परिवार के खिलाफ न्याय मांगने के कारण मारपीट हो तो उसकी सहायता करने वाला कोई भी नही जबकि जिले के बाहर अगर कोई आदिवासियों पर अत्याचार होते है तो उस जिले को और उस गांव को लाखो और हजारों की तादात में आदिवासी संगठन अपनी उपस्थिति अपने जिले से जाकर दर्ज करवाते है परंतु राजनीतिक पार्टियों में जाने की मंशा लेकर पैदा हुवे पधाधिकारी और कार्यक्रताओं की आज तक नींद नही उड़ी और ना ही कोई संगठन और आदिवासी समाज को न्याय और आदिवासी समाज को अत्याचार मुक्त करवाने वाले लोग अपने ही जिले में गांधारी की तरह अपनी आखों पर पट्टी बांध कर मूक दर्शक बने हुवे है देखना यह है की इस तहसीदार के खिलाफ कोई संगठन खड़ा होकर न्याय दिलवाता है या फिर एक दिन आवेदन कर हुडदंग करवाकर समाज के नाम पर नेतागिरी में अपना भविष्य खोजने राजनेतिक पार्टियों की शरण में जाकर मौन धारण कर गुम हो जाते है ।

वोज संवाददाता ने जवरी से बात की तो उन्होंने बताया की ,,,में और मेरे पति और पुत्र के साथ जनसुनवाई में फर्जी नामांतरण करने की शिकायत की थी जिसकी सुनवाई के लिए तहसीलदार कार्यालय उपस्थित हुवी थी और उसी दिन बहादुर और खेलजी भी उपस्थित हुवे थे जोर जोर से तहसील परिसर में चिल्लाने लगे और हमको धमकी देने लगे की अब हम तुम्हारी जमीन नही देंगे और वो अब हमारी ही है ।इस शोर को सुनकर तहदीदार महोदय जितेंद्रसिंह तोमर अपने ऑफिस से निकले और मेरे को और मेरे पति और मेरे पुत्र को थप्पड़ मारे और जोर से धक्का मारकर तहसील कार्यालय से बाहर निकालने लगे जिससे में काफी डर गई और अपने घर चली गई उसके बाद आज मेने जिला कलेक्टर को फिर से जनसुनवाई में तहसीलदार जितेंद्रसिंह तोमर से विरुद्ध कार्यवाही के लिए जनसुनवाई में आवेदन दिया है ।

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