तुच्छ राजनीति …..उर्फ झकनावदा

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वॉईस ऑफ झाबुआ

कहते है राजनीति क्या क्या करवा सकती है कभी इज्जत दांव पर तो कभी इज्जत जलील भी हो जाती है तो भिया कुछ ऐसा ही हुआ झकनावदा में एक पत्रकार ने जो साहस किया जो लिखता था वो लिखा तो नेताजी को रास नही आया और समाज के सार्वजनिक कार्यक्रम के बहाने समाज को भड़काकर उस कलमकार को टारगेट कर दिया ……..हम तो यही कहेंगे कि नेता जी राजनीति चमकाने के लिए क्या क्या हथकंडे अपनाओगे कलमकार ने ऐसा कुछ नही लिखा था कि जिससे किसी समाज को ठेस पहुचने जैसा हो न किसी नेता का नाम लिखा था फिर उस कलमकार की हत्या करने जैसा साहस उन लोगो ने किया जिसमें करीब सौ से ज्यादा लोगो ने एक ही व्यक्ति की बेरहमी से पिटाई की यह कहा का न्याय है अगर आपको कोई दिक्कत या समस्या थी तो आप कोर्ट जाते कानून से काम लेते पर आपने तो समाज की भीड़ के नाम पर खुद कानून हाथ मे ले लिया जो कि सरेआम गुंडागर्दी दर्शाता है …….

अब सवाल यह उठता है कि क्या उन सभी 100 लोगो पर एक साथ fir होगी क्या कानून उन सभी पर मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही करेगा यह बड़ा सवाल है

झकनावदा चौकी पर जिस तरह से एक साथ गुंडागर्दी करते हुए लोग इकट्ठा हुए वहां से पुलिस ने उन्हें क्यो नही हटाया जबकि पुलिस के सामने ही वो लोग उसे मारते रहे ….अगर पुलिस विभाग चाहे तो पूरे नगर के साथ ही चौकी के cctv फुटेज खंगाल ले दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा ……..
हम तो यही कहेंगे कि जितना भी जोर जुल्म करना है करलो पर कलमकार तो सच लिखते है और लिखते रहेगें ….

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