एसपी साहब बचा लो हमारे गांव को मुझे नशा ख़रीदने के लिए पैसे दे दो, नहीं तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.?

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कल्याणपुरा

ये किसी फ़िल्म का डायलॉग नहीं बल्कि कल्याणपुरा कहे जाने वाले और बढ़ते नशे की लत के आदी हो गए कई नौजवान की कहानी है.

सफ़ेद दिखने वाला पाउडर, जिसके एक ग्राम की क़ीमत क़रीब 6000 रुपये है. सोने से भी मंहगा बिकने वाला ये नशा चिट्टा कहलाता है नशे के सौदागरों के लिए ये पैसे कमाने का सबसे आसान धंधा बन गया है.नई नस्ल के ऊपर दिखने लगा है ,इसकी आदत पड़ गई है. नहीं मिलने पर नींद नहीं आती है.”किसी भी नशे के सेवन के नुक़सान अलग-अलग तरह के होते हैं.लेकिन सफ़ेद पावडर का एक ऐसा नशा है जिसका एक या दो बार सेवन करने के बाद, कोई भी इसका आदी हो जाता है. और इसे छुड़ाने के लिए कई बार मरीज़ को भर्ती भी करना पड़ता है.सफेद रंग के पाउडर सा दिखने वाला ये नशा एक तरह का सिंथेटिक ड्रग्स है. हेरोइन के साथ कुछ केमिकल्स मिलाकर ये ड्रग्स तैयार किया जाता है.नशे के सौदागरों से ये बात सामने आई है कि कैसे वो युवाओं और बच्चों को अपने जाल में फंसाते हैं.कई युवा ने भी इसके बारे में बताया, “जो नशा करते हैं, वही इसे आगे बढ़ा रहे हैं. उन्हें इतना पैसा घर से नहीं मिलता तो वे इसका बिज़नेस करने लगते हैं. ताकि खुद का काम भी चल जाए और लोगों से थोड़ा पैसा भी मिल जाए.कई माता-पिता ज्यादा लाड़-प्यार कर बच्चों की हर अच्छी-बुरी आदत को नजरअंदाज कर देते हैं जो बाद में उन पर भारी पड़ जाती है.”इसके अलावा बेरोज़गारी और तेजी से बदलता नया माहौल भी एक बड़ा फ़ैक्टर है.””युवाओं के पास रोज़गार ना होने की वजह से भी वो कई बार नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं. ये समाज के लिए एक गंभीर चुनौती है.”पहले भी युवा नशे के चलते काल के गाल मै समा चुके है है और छोड़ गए अपने बीवी बच्चों को ऐसे ही रोता बिखलता छोड़ कर अब देखना है एसपी साहब क्या करवाई करते है

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