श्री सत्यसाई समिति की महिलाओं ने आयोजित किया दीप यज्ञ अनुष्ठान

650

 

@वॉइसऑफझाबुआ

दीपयज्ञ एक कम खर्चीला भावपूर्ण स्वचालित सुगम आहुति सिस्टम है। जिसमें यज्ञ का पूर्ण लाभ मिलता है। गायत्री मंत्रों के साथ भावपूर्ण इदं न मम की भावना के साथ आहुती दी जाती है । आज संसार में हर तरफ स्वार्थ का यह मेरा है का भाव है। गायत्री परिवार परमार्थ का सूत्र दे रहा है इदं न मम अर्थात् यह मेरा नही ईश्वर तुम्हारा है,। दीपयज्ञ प्रदूषण को भी कम करता है और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है, गाय का घी रोगाणुओं को भगाता है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है । तीन प्रमुख नाड़ियां है , चंद्र नाड़ी, सूर्य नाड़ी तथा सुषुम्ना नाड़ी। शरीर में चंद्र नाड़ी से ऊर्जा प्राप्त होने पर मनुष्य तन एवं मन की शांति को महसूस करता है। घी से जलाया हुआ दीपक शरीर की तीनों प्रमुख नाड़ियों को जागृत करता है। अज्ञान के अंधकार को दूर करने के लिए ज्ञान के दीपक प्रज्जवलित करना होता है। दीपक ज्ञान का प्रतीक है। जब हम अपने अंतर्मन में ज्ञान के दीप प्रज्जवलित करते हैं तो हमारा घर, मन और आंगन आलोकित होता है । उक्त बात श्री सत्यसाई सेवा समिति की महिला विंग द्वारा गुरूवार को सायंकाल 7-30 बजे से आयोजित दीप यज्ञ में गायत्री शक्ति पीठ की श्रीमती नलिनी बहिन बेैरागी ने व्यक्त किये । उन्होने युग निर्माण योजना के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी ।
श्री सत्यसाई सेवा समिति द्वारा चन्द्रशेखर आजाद मार्ग स्थित श्रीमती कृष्णा चैहान के निवास पर आयोजित दीप यज्ञ में श्रीमती नलिनी बेैरागी ने शास्त्रोक्त मंत्रों के माध्यम से दीप यज्ञ अनुष्ठान सम्पन्न करवाया । इस अवसर पर गायत्री शक्ति पीठ की श्रीमती हरिप्रिया निगम, मनोरमा डावर, निर्मला गोयल, जमुना सांकला,श्रीमती ज्योति सोनी, कृष्णा चैहान, शिवकुमारी सोनी, चंचला सोनी,किरणसोनी,भावना त्रिवेदी, संतोष चैहान, स्वाति राठौर,मधु माहेश्वरी आदि ने दीप यज्ञ के माध्यम से आहूतिया प्रदान की । इस अवसर पर महिलाओं द्वारा नाम संकीर्तन का भी आयोजन किया तथा भजनों के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त की । अन्त में महामंगल आरती के बाद भजन प्रसादी का वितरण किया गया ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here