नगर पालिका के चुनाव में सांसद,पूर्व विधायक की प्रतिष्ठा लगी दाव पर

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@Voice ऑफ झाबुआ        @Voice ऑफ झाबुआ

शहर में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर रंग जमने लगा है। वार्डों में प्रत्याशियों ने मोर्चा संभालते हुए प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया। जहां मतदाता पिछले सालों में हुए कार्यों का हिसाब भी मांग रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवारों को भी अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। इस बार चुनाव में सांसद और विधायक और पूर्व विधायक की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। पार्षद पद पर प्रत्याशियों की हार-जीत से दोनों ही बड़े नेताओं के राजनीति भविष्य की दिशा तय करेगी। बता दें कि 2023 में विधानसभा चुनाव हैं और उसके पहले नपा चुनाव को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। कुर्सी पर काबिज होने के लिए दोनों ही दल जोर लगा रहे हैं।
पेटलावद में कुल 55 उम्मीदवार मैदान में है, जिसमे भाजपा कांग्रेस उम्मीदवार के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में है। जो चुनाव में भाजपा-कांग्रेस का गणित बिगाड़ सकते हैं। कुछ वार्डों में तो त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। जिसके लिए पार्टियों को अधिक जोर लगाना पड़ रहा है। कांग्रेस ने अधिकांश नए प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। कुछ को राजनीतिक अनुभव कम है। ऐसे प्रत्याशियों को वार्डों में संघर्ष करना पड़ रहा है। हालांकि प्रत्याशियों के साथ विधायक ने भी वार्डों में घूमना शुरू कर दिया है, तो वहीं भाजपा की तरफ से बड़े नेता अभी प्रचार-प्रसार से दूर है।

बीजेपी: युवाओं के भरोसे,मुस्लिम वार्डों में चुनौती

चुनावी रण में भाजपा युवाओं के भरोसे उतरी है। पार्टी ने सबसे ज्यादा महिलाएं व युवा प्रत्याशी है। पुराने एक-दो ही पार्षदों को दोबारा मौका दिया है। इस बार पार्टी के सामने मुस्लिम वार्डों में अधिक चुनौती है। जहां पिछले चुनाव में भी पार्टी को हार झेलना पड़ी थी।
आपको बता दे कि इस बार चुनाव में कुछ पूर्व पार्षद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में खड़े है, लेकिन हम उनसे यह कहना चाहते है कि 5 साल पहले आपको जनता ने अपने वार्ड का प्रतिनिधि बनाकर नगर परिषद में भेजा था, कि कुछ भी गलत हुआ तो हमारे प्रतिनिधि आवाज बुलंद करेंगे, लेकिन पूरे 5 सालो में जितने भी निर्णय या काम हुए उसमें आपने विरोध करने की बजाय अपनी खामोशी बनाई रखी और जनता को 5 साल गर्त में धकेल दिया। जनता को भारी समस्याओं में डालने में आप भी उसी तरह जिम्मेदार है, जिस तरह नगर परिषद अध्यक्ष को जिम्मेदार जनता द्वारा ठहराया गया और अब आप बागी बनकर चुनाव मैदान में खड़े हो गए। आप किस मुंह से जनता से वोट मांगोगे। जनता को 5 साल जो जख्म दिए उसके लिए या जनता के जमीनी स्तर पर जो काम नहीं हुए उसके लिए। जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी। चाहे आप इस चुनाव में अपना कितना ही जोर लगा लो।
पेटलावद के कुछ वार्डो में कई ऐसे उम्मीदवार खड़े है, जिनमे व्यवहार और आचरण में बिल्कुल शालीनता नहीं दिखती। यह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में है। कई निर्दलीय ऐसे है, जिनके व्यवहार और आचरण के किस्से पूरे नगर में जग जाहिर है। जरा सी बात पर धमकाना, मारपीट पर उतर जाना और कोई कुछ कहे तो उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवाने थाने तक पहुंच जाना। ऐसा एक मामला हुआ था 2012 की नगर परिषद कार्यकाल के समय, जब नगर परिषद उपाध्यक्ष को उसी झुझारू, कर्मठ, शिक्षित, योग्य उम्मीदवार से माफी तक मांगनी पड़ गई थी, नहीं तो यह उम्मीदवार उनके खिलाफ थाने पहुंच गए थे। हालांकि इन निर्दलियों के पक्ष में कुछ लोगो द्वारा जरूर माहौल बनाया जा रहा है, लेकिन हम उनसे कहना चाहते है ये पब्लिक है सब जानती है। जो लोग इनके सपोर्ट में है जनता उन्हें भी पसंद नही करती है और उनके काले कारनामे और किस्से जग जाहिर है। वहीं एक शराब माफिया भी चुनावी मैदान में उतर गया और अपने आप को जुझारू और ईमानदार प्रत्याशी बताने में नहीं चूक रहा।
नगर के चौराहों पर चर्चा है कि वार्ड क्रमांक 8 में पूर्व पार्षद और भाजपा अनुसूचित मोर्चा के जिलाध्यक्ष साहब इस बार टिकट न मिलने से अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार करने में जुटे हुए है। यह बात संगठन तक पहुंच चुकी है। हालाकि अभी तक इन माननीय नेता पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। उसी का फायदा यह उठा रहे है और भाजपा की नय्या डुबाने के प्रयास में है। इस वार्ड में यह भी चर्चा है कि इन माननीय नेता ने अपने करीबी रिश्तेदार को निर्दलीय मैदान में खड़ा कर दिया और अब उसी का प्रचार कर भाजपा को डेमेज करने में जुटे है। संगठन को ऐसे नेताओं पर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। चर्चा तो यह भी है कि एक तो 5 सालो में जो नगर में भ्रष्टाचार की गंगा बही उसमें इन्होंने भी कंधे से कंधा मिलाकर हाथ धोए है। यही वजह रही जो इनको इस बार पार्टी ने टिकट नहीं दिया।
इस बार वार्ड 8 में भाजपा के अधिकृत हुए जो प्रत्याशी है उनका काफी सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। हालांकि अभी जनता यहां कुछ नही कह रही है कि वह किसे अपना पार्षद बनाएगी। हां यह जरूर है कि जनता इस और इशारा कर रही है कि जो अच्छे काम करेगा और व्यवहार अच्छा रहेगा उसे ही अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। भाजपा के प्रत्याशी बने राजेश यादव 10 वर्ष पहले भी इस वार्ड से चुनाव जीते थे वो अपने व्यवहार और कार्य कुशलता की बदौलत अपनी एक अमिट छाप छोड़ी थी। शहर की अटल बस्ती को भी बसाने में इनकी अहम भूमिका रही। यही इनके लिए प्लस पॉइंट बन रहे है।  हालांकि अब 30 सितंबर को ही पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा।
वहीं पेटलावद में सबसे चर्चित अगर कोई वार्ड है तो वह है वार्ड क्रमांक 6। दरअसल, यहां भाजपा ने जिसे अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया था उसके खिलाफ 10 साल से पार्षद रहे बागी उम्मीदवार मैदान में उतर गया है। यही नहीं इन्हे श्रेय देने में भाजपा के पदाधिकारियों और कुछ माननीय नेताओं ने भी कोई कमी कसर नही छोड़ी और आज स्थिति यह हो गई है कि भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी अकेले हो गए है, लेकिन अब यहां की बागडोर जनता के हाथ में है, कि वे एक नए चेहरे को अपना प्रतिनिधि चुनती है या फिर उसी पुराने चेहरे को मोका देती है, जिसने 5 सालों में अपनी खामोशी अख्तियार कर रखी थी। हालांकि अंदरूनी सर्वे बता रहा है कि यहां जनता बदलाव कर सकती है। देखना यह दिलचस्प है कि क्या यहां भाजपा का बागी जीतेगा या समाजसेवी का फूल खिलेगा।

इन वार्डो पर है सबकी नजर
पेटलावद के कुछ वार्ड ऐसे है जिन पर नगर सहित प्रदेश तक सबकी नजर है। इन वार्डो में वार्ड क्रमांक 1,2,5,6,7,8,9,12 का नाम शामिल हैं। यहां भाजपा के प्रतिद्वंदी के रूप में भाजपा के ही लोग सामने खड़े है। देखना यह दिलचस्प होगा कि आखिर जनता इस बार यहां से किसे चुनती है।

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