सड़को पर भाजपा क्या ऐसे दिन देखना बाकी रह गए थे ….? पार्टी के नेताओ कुछ तो शर्म करो….पार्टी को माँ कहते हो…? भाजपा के गढ़ में भाजपा का गढ्ढा भरने आए सीएम जमीनी उम्मीदवार को टिकिट न देना …अब पड़ रहा भारी

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झाबुआ/पेटलावद

कल जिले के पेटलावद नगर मे प्रदेश के मुखिया का आगमन हुआ जिसके लिए जोर शोर से खूब प्रचार प्रसार ओर लोगो को लाया गया खूब सजावट की गई जगह जगह झंडे बैनरों से शहर को पाट दिया गया ……पर जैसे है सो एम साहब की सभा हुई लोग घर चले गए और पार्टी का झंडा जिसके लिए भाजपा के उन नेताओं ने क्या कुछ नही किया वह झंडे सड़को पर गिरे हुए नज़र आए कोई झंडा रोड पर तो कोई झंडा कचरों के ढेर पर पड़ा हुआ नजर आया ….क्या यह वही भाजपा है जिसे हर कार्यकर्ता अपनी माँ मानता है अगर माँ मानता है तो पार्टी के चुनाव चिन्ह वाले झंडों की ऐसी दुर्दशा क्यो …?

क्या भाजपा के वरिष्ठ ओर बड़े स्थानीय नेताओं को थोड़ी सी भी शर्म नही आई आखिर सी एम साहब के साथ फोटो लेने अथवा अपने आपको बड़ा दिखाने के चक्कर मे क्या पार्टी का अनुशाशन ही भूल गए नेता ….?

भाजपा का गड्ढा भरने आए भाजपा के मुख्यमंत्री

जिंहा कहने को तो थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा पर है सच ..पेटलावद वैसे तो भाजपा का गढ़ है यहां भाजपा 100% नही 110% दांवे के साथ चुनाव जीत रही है पर फिर भी भाजपा के सी एम को इस छोटे से चुनाव के लिए पेटलावद आना पड़ा यह चर्चा का विषय है …असल मे बात यह है कि इस मर्तबा इस चुनाव में भाजपा को भाजपा से ही खतरा ज्यादा है कांग्रेस तो यहां पर मुकाबले में दूर दूर तक नज़र नही आ रही है यहां भाजपा के ही बागी खड़े उम्मीदवारों ने भाजपा प्रत्याशियों का गणित बिगाड़ कर रख दिया है जिस कारण स्थिति ऐसी हैं कि बड़े बड़े दिग्गज चुनाव हार सकते है ..जिसके लिए सीएम साहब तक पार्टी संगठन को साफ साफ बोल गए है कि चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों ओर भाजपा के बागियो का तालमेल बिठाकर भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में उन्हें बिठाया जाए ओर भाजपा प्रत्याशी को ही जिताया जाए अगर तालमेल नही जमा तो पार्टी को भारी नुकसान यहां होने की सम्भावना है ….
खेर यह सब भाजपा का अंदरूनी मामला है पर भाजपा ने यहां जमीनी कार्यकर्ताओ को दरकिनार कर पेसो के बल पर जो टिकिट बांटे है वो अब भाजपा के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो रहे है ….

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